वास्तु शास्त्र (Science of Architecture)

वास्तु शास्त्र एक प्राचीन भारतीय विद्या है जो घर, मंदिर, महल और अन्य भवनों के निर्माण में संलग्न है। इसका उद्देश्य भवन की स्थापत्य विज्ञान को जानना है जिससे एक स्थान के वास्तविक और मनोवैज्ञानिक आधार पर निर्माण किया जा सके। वास्तु शास्त्र का विशेष महत्व भारतीय संस्कृति में है जो इसके समान विज्ञान और कला का संगम है।

इस विद्या का उल्लेख वेदों, पुराणों और शास्त्रों में मिलता है जिनमें संस्कृत भाषा में विवरण दिया गया है। वास्तु शास्त्र में भवन की स्थापत्य, वस्तुनिष्ठ विवेचन, वस्तुकला, वास्तु विज्ञान, वास्तु तत्त्व, गृह वास्तु, मन्दिर वास्तु, नगर वास्तु, सामुदायिक वास्तु और लोक वास्तु जैसे विषय शामिल होते हैं। इसके अनुसार, भवनों के निर्माण में स्थान, उद्देश्य, रचना, विशिष्टता और अनुकूलता का ध्यान रखना आवश्यक होता है।

वास्तु शास्त्र हमारे जीवन में बहुत महत्वपूर्ण है, जिसे हमारे घर, कार्यालय और दुकान जैसे स्थानों के निर्माण और व्यवस्था में उपयोग किया जाता है। इसके अनुसार, हमारे आस-पास की प्रकृति के अनुसार हमारे भवनों की वास्तु नियमित होनी चाहिए ताकि हमारे जीवन में सुख, समृद्धि और समानता का आभास हो।

वास्तु शास्त्र में कुछ मुख्य सिद्धांत हैं, जो हमें हमारे घर और अन्य स्थानों का निर्माण करते समय ध्यान में रखने चाहिए। प्रथम सिद्धांत है दिशा। वास्तु शास्त्र के अनुसार, आपके घर या दुकान की दिशा बहुत महत्वपूर्ण है। दक्षिण दिशा धन के लिए अधिक उपयुक्त होती है, पश्चिम दिशा भविष्य में सफलता के लिए अधिक उपयुक्त होती है, उत्तर दिशा खुशहाली के लिए अधिक उपयुक्त होती है और पूर्व दिशा शुभ लाभ के लिए अधिक उपयुक्त होती है।

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वास्तु शास्त्र महत्वपूर्ण है?

हां, वास्तु शास्त्र महत्वपूर्ण है। यह एक प्राचीन विज्ञान है जो हमें स्थान का विश्लेषण करने और उसे उपयुक्त ढंग से व्यवस्थित करने की शिक्षा देता है। इसका उद्देश्य शुभ एवं अनुकूल ऊर्जा का संचार करना होता है ताकि व्यक्ति की जिंदगी में समृद्धि, सुख, और सम्पन्नता हो सके

वास्तु शास्त्र में कुछ महत्वपूर्ण सिद्धांत होते हैं जैसे कि दिशाओं का महत्व, सटीक आकार का चयन, ऊर्जा के संचार के लिए स्थानों की विशेषताओं का विश्लेषण आदि। इसके अनुसार आवास और कार्यालय इत्यादि की निर्माण योजना को बनाते समय ये सिद्धांतों का ध्यान रखना बहुत आवश्यक होता है।

वास्तु शास्त्र बताता है कि कौन से रंग, कौन से सामग्री और कौन से स्थान आपके घर या ऑफिस के लिए उपयुक्त होंगे। इस शास्त्र के अनुसार, अगर हम सही रूप से डिजाइन करते हैं तो हमारे जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं। इसके अलावा, यह शास्त्र भौतिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी महत्वपूर्ण है। उदाहरण के लिए, उत्तर दिशा धन का संबंधित होता है इसलिए उत्तर दिशा में धन के स्थान का निर्माण करना उचित होता है। वास्तु शास्त्र में बताया गया है कि स्थान और दिशाएँ सही होने से स्थान के निवासियों को स्वास्थ्य, संतुलन और खुशहाली का अनुभव होता है।

वास्तु शास्त्र के अनुसार सटीक वास्तु व्यवस्था वास्तव में मानव जीवन को प्रभावित करती है। एक उचित वास्तु व्यवस्था न केवल आपकी आवास या कार्यालय की सुविधाओं को बढ़ाती है, बल्कि आपके जीवन को एक सकारात्मक तरीके से प्रभावित करती है।

इस शास्त्र का उपयोग न केवल घर के लिए होता है बल्कि इसे व्यापार स्थल, ऑफिस और व्यापार के लिए भी उपयोग किया जाता है। यह शास्त्र लोगों को उनकी जिंदगी के विभिन्न पहलुओं के लिए समृद्धि और सफलता के मार्गदर्शन में मदद करता है।

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