Srimad Bhagavadgita Chapter 13

Srimad Bhagavadgita अध्याय 13 श्लोक 1 to 10 श्लोक (भगवद्गीता, अध्याय 13, श्लोक 1)अर्जुन उवाच:प्रकृतिं पुरुषं चैव क्षेत्रं क्षेत्रज्ञमेव च।एतद्वेदितुमिच्छामि ज्ञानं ज्ञेयं च केशव।। हिंदी अनुवाद और अर्थ: अर्जुन बोले:हे केशव! मैं प्रकृति और पुरुष के बारे में, क्षेत्र (शरीर) और क्षेत्रज्ञ (शरीर का ज्ञाता, अर्थात आत्मा) के बारे में जानना चाहता हूँ। साथ ही … Continue reading Srimad Bhagavadgita Chapter 13