KP ज्योतिष में संपत्ति को किराए पर देने का फॉर्मूला (Nakshatra-Based Analysis for Property Rental in KP Astrology)
संपत्ति को किराए पर देने के लिए हमें चौथे (4th), छठे (6th), सातवें (7th), दसवें (10th), और ग्यारहवें (11th) भावों का विश्लेषण करना होता है।
KP ज्योतिष में, ग्रहों के नक्षत्र (Nakshatra) और उपनक्षत्र (Sub-Lord) से यह निर्धारित किया जाता है कि संपत्ति से लाभ कब और कैसे मिलेगा।
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KP ज्योतिष में फॉर्मूला:
संपत्ति किराए पर देने का मुख्य फॉर्मूला:
(चौथे भाव का उप-स्वामी) + (सातवें भाव का उप-स्वामी) + (ग्यारहवें भाव का उप-स्वामी) ⇒ किराए पर देने की योग्यता।
यदि यह ग्रह नक्षत्र में छठे, सातवें, या ग्यारहवें भाव से जुड़े हैं, तो संपत्ति किराए पर दी जा सकती है।

मुख्य भावों की भूमिका:
- चौथा भाव (4th House) – संपत्ति का स्वामित्व और अचल संपत्ति।
- छठा भाव (6th House) – किराएदार और उससे जुड़े कानूनी मामले।
- सातवां भाव (7th House) – अनुबंध, समझौते और डील्स।
- दसवां भाव (10th House) – व्यापारिक सौदे, निवेश और लेन-देन।
- ग्यारहवां भाव (11th House) – किराए से होने वाली आय और आर्थिक लाभ।
नक्षत्रों और उप-स्वामियों के आधार पर विश्लेषण:
KP ज्योतिष में, किसी ग्रह का नक्षत्र स्वामी (Star-Lord) और उपनक्षत्र स्वामी (Sub-Lord) यह तय करता है कि वह ग्रह कैसे प्रभाव डालेगा।
- यदि चौथे भाव का उप-स्वामी ग्यारहवें भाव से जुड़ा हो, तो संपत्ति किराए पर देने से अच्छा लाभ होगा।
- यदि सातवें भाव का उप-स्वामी छठे भाव से जुड़ा हो, तो किराएदार के साथ विवाद या कानूनी समस्या हो सकती है।
कुंडली से मूल्यांकन का तरीका:
- चौथे भाव के स्वामी और उप-स्वामी की स्थिति देखें।
- ग्यारहवें भाव का स्वामी और उप-स्वामी देखें – यदि यह चौथे भाव से संबंध रखता हो, तो किराया मिलना तय है।
- सातवें भाव का स्वामी और उसका नक्षत्र स्वामी देखें।
- दसवें भाव से जुड़े ग्रहों की स्थिति देखें।
- राहु और केतु की स्थिति भी देखें, क्योंकि वे अप्रत्याशित परिवर्तन ला सकते हैं।
उदाहरण: संपत्ति किराए पर देने का योग
मान लीजिए आपकी कुंडली में:
- चौथा भाव का उप-स्वामी: गुरु (Jupiter)
- ग्यारहवां भाव का उप-स्वामी: शुक्र (Venus)
- सातवां भाव का उप-स्वामी: बुध (Mercury)
- नक्षत्र स्थिति:
- गुरु (Jupiter) पुनर्वसु नक्षत्र (Punarvasu, स्वामी गुरु) – अचल संपत्ति का विस्तार।
- शुक्र (Venus) भरणी नक्षत्र (Bharani, स्वामी शुक्र) – आर्थिक लाभ।
- बुध (Mercury) आश्लेषा नक्षत्र (Ashlesha, स्वामी बुध) – समझौते और अनुबंध।
विश्लेषण:
- गुरु (Jupiter) चौथे भाव का स्वामी है और पुनर्वसु नक्षत्र में है, जिसका संबंध संपत्ति से है।
- ग्यारहवें भाव का स्वामी शुक्र भरणी नक्षत्र में है, जो संपत्ति से आर्थिक लाभ का योग बनाता है।
- सातवें भाव में बुध आश्लेषा नक्षत्र में है, जो अनुबंध और समझौतों को दर्शाता है।
निष्कर्ष:
यह योग बताता है कि संपत्ति को किराए पर देने से आर्थिक लाभ होगा, और किराएदार के साथ संबंध अच्छे रहेंगे।
संपत्ति किराए पर देने के लिए शुभ समय (Muhurat Selection for Renting Property)
KP ज्योतिष में सही समय चुनने के लिए:
- चंद्रमा की स्थिति देखें:
- जब चंद्रमा चौथे, सातवें, दसवें, या ग्यारहवें भाव में हो।
- शुभ नक्षत्रों में हो जैसे श्रवण, पुनर्वसु, रोहिणी, उत्तराषाढ़ा, उत्तराभाद्रपद।
- दशा और अंतरदशा:
- चौथे या ग्यारहवें भाव के स्वामी की दशा या अंतरदशा में संपत्ति किराए पर देना लाभदायक होगा।
- ग्रह गोचर (Transit Analysis):
- शुक्र और गुरु का चौथे या दसवें भाव में गोचर संपत्ति के लाभ को बढ़ा सकता है।
- शनि का ग्यारहवें भाव में गोचर संपत्ति से स्थायी आय प्रदान करता है।
संभावित बाधाएं और उनके समाधान:
| बाधा | संकेत | समाधान |
|---|---|---|
| किराएदार से विवाद | सप्तम भाव का स्वामी छठे भाव में | समझौते से पहले शुभ मुहूर्त का चयन करें |
| किराए से कम लाभ | ग्यारहवें भाव का स्वामी कमजोर | गुरु और शुक्र के लिए उपाय करें |
| संपत्ति खाली रहने की संभावना | चौथे भाव का स्वामी नीच राशि में | मंगलवार या शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ करें |
KP ज्योतिष में संपत्ति को किराए पर देने के लिए नक्षत्र-आधारित विश्लेषण
संपत्ति को किराए पर देने के लिए चौथा (4th), सातवां (7th), दसवां (10th), और ग्यारहवां (11th) भाव महत्वपूर्ण होते हैं।
इन भावों के स्वामी, उप-स्वामी (Sub-Lord), और नक्षत्र स्वामी यह तय करते हैं कि संपत्ति किराए पर दी जा सकती है या नहीं, और उससे कितनी आय होगी।
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📌 फॉर्मूला: संपत्ति किराए पर देने का योग
संपत्ति किराए पर देना संभव होगा यदि:
📌 (4th House Sub-Lord) = ग्रह जो 4th, 7th, 10th, और 11th भाव से जुड़ा हो।
📌 (7th House Sub-Lord) = अनुबंध और किराएदार का संकेत देता है।
📌 (11th House Sub-Lord) = किराए से प्राप्त धन और लाभ।
📌 यदि ये ग्रह शुभ नक्षत्र में हों (श्रवण, पुनर्वसु, रोहिणी, उत्तराषाढ़ा, उत्तराभाद्रपद, चित्रा, स्वाति, विशाखा) तो लाभकारी रहेगा।
🔍 उदाहरण 1: जब संपत्ति किराए पर देना शुभ होता है
🔹 कुंडली विवरण:
- चौथा भाव (4th House Sub-Lord): गुरु (Jupiter)
- सातवां भाव (7th House Sub-Lord): बुध (Mercury)
- दसवां भाव (10th House Sub-Lord): शनि (Saturn)
- ग्यारहवां भाव (11th House Sub-Lord): शुक्र (Venus)
- नक्षत्र स्थिति:
- गुरु पुनर्वसु नक्षत्र में (Punarvasu – स्वामी गुरु) → स्थायी संपत्ति का विस्तार।
- बुध श्रवण नक्षत्र में (Shravana – स्वामी चंद्र) → अनुबंध और लीज एग्रीमेंट।
- शनि उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में (Uttara Ashadha – स्वामी सूर्य) → कानूनी स्थिरता और संपत्ति से लाभ।
- शुक्र रोहिणी नक्षत्र में (Rohini – स्वामी चंद्र) → लग्जरी संपत्ति और अधिक रेंट।
🔹 विश्लेषण:
✔ गुरु (Jupiter) चौथे भाव का उप-स्वामी है, और पुनर्वसु नक्षत्र में है, जिससे संपत्ति को किराए पर देना शुभ रहेगा।
✔ बुध (Mercury) जो सातवें भाव का उप-स्वामी है, श्रवण नक्षत्र में है, जो दर्शाता है कि किराएदार मिलने में आसानी होगी।
✔ शनि (Saturn) जो दसवें भाव में है, उत्तराषाढ़ा में है, जिससे संपत्ति से नियमित और स्थायी आय होगी।
✔ शुक्र (Venus) जो ग्यारहवें भाव का स्वामी है, रोहिणी नक्षत्र में होने से अच्छा किराया मिलेगा और किराएदार का व्यवहार अच्छा रहेगा।
🔹 परिणाम:
➡ संपत्ति किराए पर देना अत्यधिक लाभकारी होगा।
➡ किराएदार लंबे समय तक रहेगा और नियमित भुगतान करेगा।
🔍 उदाहरण 2: जब संपत्ति किराए पर देने में समस्या आती है
🔹 कुंडली विवरण:
- चौथा भाव (4th House Sub-Lord): मंगल (Mars)
- सातवां भाव (7th House Sub-Lord): राहु (Rahu)
- दसवां भाव (10th House Sub-Lord): शनि (Saturn)
- ग्यारहवां भाव (11th House Sub-Lord): केतु (Ketu)
- नक्षत्र स्थिति:
- मंगल विशाखा नक्षत्र में (Vishakha – स्वामी गुरु) → संपत्ति बेचने का संकेत।
- राहु स्वाति नक्षत्र में (Swati – स्वामी शुक्र) → किराएदार के साथ विवाद।
- शनि मूल नक्षत्र में (Moola – स्वामी केतु) → संपत्ति में कानूनी बाधाएं।
- केतु आश्लेषा नक्षत्र में (Ashlesha – स्वामी बुध) → किराए से नुकसान और धोखा।
🔹 विश्लेषण:
❌ मंगल (Mars) जो चौथे भाव का स्वामी है, विशाखा नक्षत्र में है, जिससे संकेत मिलता है कि संपत्ति बेचने का योग है, किराए पर देना सही नहीं होगा।
❌ राहु (Rahu) सातवें भाव का उप-स्वामी है और स्वाति नक्षत्र में है, जिससे किराएदार से विवाद या धोखाधड़ी हो सकती है।
❌ शनि (Saturn) जो दसवें भाव का स्वामी है, मूल नक्षत्र में है, जिससे लीगल मामले आ सकते हैं।
❌ केतु (Ketu) जो ग्यारहवें भाव का स्वामी है, आश्लेषा नक्षत्र में है, जिससे किराए से धन हानि होगी।
🔹 परिणाम:
➡ संपत्ति किराए पर देने से नुकसान होगा और विवाद हो सकते हैं।
➡ संपत्ति बेचने का योग बन रहा है, इसलिए इसे बेचने पर विचार करें।
🔍 उदाहरण 3: जब संपत्ति पर कब्जे की समस्या हो
🔹 कुंडली विवरण:
- चौथा भाव (4th House Sub-Lord): चंद्रमा (Moon)
- सातवां भाव (7th House Sub-Lord): शनि (Saturn)
- दसवां भाव (10th House Sub-Lord): बुध (Mercury)
- ग्यारहवां भाव (11th House Sub-Lord): राहु (Rahu)
- नक्षत्र स्थिति:
- चंद्रमा पुष्य नक्षत्र में (Pushya – स्वामी शनि) → स्थायी संपत्ति।
- शनि अनुराधा नक्षत्र में (Anuradha – स्वामी शनि) → किराएदार लंबा रहेगा।
- बुध आश्लेषा नक्षत्र में (Ashlesha – स्वामी बुध) → अनुबंध में धोखा।
- राहु शतभिषा नक्षत्र में (Shatabhisha – स्वामी राहु) → कानूनी बाधाएं।
🔹 विश्लेषण:
⚠ चंद्रमा पुष्य नक्षत्र में है, जो बताता है कि संपत्ति अच्छी स्थिति में है।
⚠ शनि अनुराधा नक्षत्र में है, जिससे किराएदार लंबे समय तक रहेगा, लेकिन वह संपत्ति खाली करने में समस्या खड़ी कर सकता है।
⚠ बुध आश्लेषा नक्षत्र में है, जिससे किराएदार अनुबंध की शर्तों का पालन नहीं करेगा।
⚠ राहु शतभिषा नक्षत्र में है, जिससे कानूनी मामले और कब्जे की समस्या आ सकती है।
🔹 परिणाम:
➡ किराएदार अधिक समय तक रुकेगा और संपत्ति खाली करने में परेशानी होगी।
➡ अनुबंध स्पष्ट और मजबूत बनाना जरूरी है।
✅ (Final Analysis)
| स्थिति | योग | नतीजा |
|---|---|---|
| संपत्ति किराए पर देना शुभ | 4th, 7th, 10th, 11th भाव शुभ ग्रहों और शुभ नक्षत्रों में हो | स्थिर और अच्छा किराया मिलेगा। |
| संपत्ति से नुकसान | 4th, 7th, 11th भाव के उप-स्वामी राहु/केतु में हों | किराएदार से विवाद या कानूनी समस्या हो सकती है। |
| संपत्ति बेचने का योग | 4th भाव में मंगल, शनि, राहु, केतु हों | बेचना किराए पर देने से अधिक लाभकारी रहेगा। |
निष्कर्ष:
KP ज्योतिष के अनुसार, यदि चौथे, सातवें, और ग्यारहवें भाव के उप-स्वामी शुभ ग्रहों के प्रभाव में हों और इनके नक्षत्र स्वामी लाभकारी हों, तो संपत्ति किराए पर देने से आर्थिक लाभ होगा।
- शुभ ग्रहों की दशा और गोचर में संपत्ति को किराए पर देना अधिक लाभकारी रहेगा।
- चंद्रमा की स्थिति, दशा-अंतरदशा, और नक्षत्रों का ध्यान रखकर उचित समय का चयन करें।
KP Astrology में पार्टी में पद ( Post in Political Party ) प्राप्त करने का फॉर्मूला
1. Overdependence on Nakshatras Can Lead to Missed Opportunities
Many landlords and tenants wait for a so-called “auspicious” nakshatra before finalizing a rental deal. This delay can cause financial losses, as good tenants might move elsewhere or rental income may be lost due to unnecessary postponements.
🔗 Understanding the Role of Nakshatras in KP Astrology
2. Conflicting Planetary Influences Create Confusion
While nakshatras indicate certain tendencies, they do not work in isolation. Other planetary transits, dashas, and personal horoscopes must also be considered. Blindly following nakshatra-based predictions can lead to misleading results, causing more harm than benefit.



