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जानिए घर के हर कमरे के लिए वास्तु और ज्योतिष शास्त्र अनुसार दिशा, ग्रह और ऊर्जा से जुड़ी बातें और समाधान।
Vastu Guruji से खास मार्गदर्शन।

Indian Vastu Shastra and Astrology

भारतीय वास्तु शास्त्र और ज्योतिष शास्त्र यह मानते हैं कि घर के प्रत्येक हिस्से का संबंध किसी विशेष ग्रह, ऊर्जा और क्रिया से होता है। Vastuguruji के अनुसार, जब हम घर का निर्माण या आंतरिक सज्जा करते हैं, तो यह समझना आवश्यक हो जाता है कि किस कमरे में कौन-सा कार्य होना चाहिए और वह हमारे जीवन के किन पहलुओं को प्रभावित करता है। आइए विस्तार से समझते हैं हर एक कमरे का ज्योतिष और वास्तु के अनुसार महत्व:


ज्योतिष के अनुसार पहला घर ki दिशा: होम ऑफिस और कार्यक्षेत्र से संबंधित स्थान

होम ऑफिस और कार्यक्षेत्र से संबंधित स्थान

यह स्थान व्यक्ति की बुद्धि, योजना, निर्णय क्षमता और एकाग्रता से जुड़ा होता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह दिशा “स्वयं” (Self) से संबंधित मानी जाती है। यही कारण है कि इस दिशा में काम करने से आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और सोचने की शक्ति में वृद्धि होती है।

इस दिशा पर बुध और शनि ग्रह का प्रभाव माना जाता है, जो क्रमशः बुद्धिमत्ता और अनुशासन के प्रतीक हैं। यदि इस स्थान का उपयोग ऑफिस के रूप में किया जाए — जैसे कि स्टडी टेबल, लैपटॉप, फाइल्स, या प्रोफेशनल मीटिंग की व्यवस्था — तो कार्यक्षमता में स्पष्ट रूप से सुधार आता है।

चूंकि यह दिशा आत्मचिंतन और आत्मविश्लेषण से जुड़ी होती है, इसलिए यह स्थान शयनकक्ष (बेडरूम) के लिए भी उपयुक्त माना गया है। बेडरूम में भी व्यक्ति अपने आप से जुड़ता है, विश्राम करता है और अगली दिनचर्या की मानसिक तैयारी करता है।


ज्योतिष के अनुसार दूसरा घर ki दिशा: पार्टी एरिया, बार, निजी मेहमानों के साथ बैठने की जगह

यह घर का वह हिस्सा होता है जहाँ हम मेहमानों का स्वागत करते हैं और सामाजिक मेलजोल रखते हैं। इसका संबंध शुक्र और चंद्र ग्रह से होता है। यदि यह स्थान स्वच्छ और आकर्षक हो, तो सामाजिक जीवन सुदृढ़ होता है और प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है।


ज्योतिष के अनुसार तीसरा घर ki दिशा: एकांत स्थान, मौसमी वस्त्रों और सामान का भंडारण

यह वह जगह है जहाँ हम ऐसे वस्त्र या सामग्री रखते हैं जो अभी आवश्यक नहीं हैं लेकिन भविष्य में उपयोगी हो सकते हैं। यह राहु और केतु जैसे छाया ग्रहों से जुड़ा होता है। यहां सफाई और व्यवस्थित व्यवस्था बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है ताकि अव्यवस्था से नकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न न हो।


ज्योतिष के अनुसार चौथा घर ki दिशा: मुख्य प्रवेश द्वार, भूमि या फ्लैट का प्रवेश क्षेत्र

मुख्य द्वार पूरे घर की ऊर्जा का प्रवेश बिंदु होता है। यह सूर्य और गुरु ग्रह से संबंधित होता है। यह स्थान खुला, साफ-सुथरा और स्वागत योग्य होना चाहिए ताकि सकारात्मक ऊर्जा घर में प्रवाहित हो।


ज्योतिष के अनुसार पांचवां घर ki दिशा: बच्चों का कमरा, हॉबी एरिया, खेलकूद, जिम, मनोरंजन

यह रचनात्मक ऊर्जा और गतिविधियों का केंद्र होता है। इसका संबंध मंगल और बुध ग्रह से है। इसे रंगीन, प्रोत्साहन देने वाला और सुरक्षित बनाना चाहिए ताकि बच्चों की शिक्षा, रचनात्मकता और उत्साह को समर्थन मिले।


ज्योतिष के अनुसार छठा घर ki दिशा: प्रवेश फोयर, कॉमन पैसेज, ड्राइंग रूम

यह घर का वह भाग है जो अन्य कमरों को जोड़ता है। इसका संबंध चंद्र और गुरु ग्रह से होता है। यहाँ पर अनावश्यक अवरोध नहीं होने चाहिए ताकि ऊर्जा का प्रवाह बाधित न हो। इसे खुला, सुव्यवस्थित और सौम्य बनाना चाहिए।


ज्योतिष के अनुसार सातवां घर ki दिशा: डाइनिंग रूम, फैमिली लॉन्ज, माता-पिता का कमरा

यह घर का पारिवारिक केंद्र होता है जहाँ परिवार एक साथ समय बिताता है। इसका संबंध चंद्रमा और शुक्र से है। इस क्षेत्र को शांत, साफ और प्रेमपूर्ण ऊर्जा से युक्त रखना आवश्यक है जिससे पारिवारिक सामंजस्य बना रहे।


ज्योतिष के अनुसार आठवां घर ki दिशा: टॉयलेट और ड्रेसिंग रूम

यह स्थान त्याग, सफाई और छुपी हुई ऊर्जा से जुड़ा होता है। इसका संबंध राहु और केतु से होता है। इस क्षेत्र को नियमित रूप से साफ-सुथरा और सुगंधित बनाए रखना चाहिए ताकि नकारात्मकता ना फैले।


ज्योतिष के अनुसार नौवां घर ki दिशा: रसोई, भोजन की तैयारी और भंडारण का स्थान

रसोई जीवन शक्ति और पोषण का स्रोत होती है। यह शुक्र और मंगल से जुड़ी होती है। यहाँ स्वच्छता, सकारात्मक ऊर्जा और संतुलित व्यवस्था से घर की संपूर्ण ऊर्जा प्रभावित होती है।


ज्योतिष के अनुसार दसवां घर ki दिशा: शयनकक्ष, बाहरी लोगों से संवाद का स्थान

यह घर का विश्राम और संवाद का क्षेत्र होता है। यह शनि और चंद्र ग्रह से जुड़ा होता है। शयनकक्ष को शांत, अंधकारपूर्ण और व्यवस्थित बनाए रखना आवश्यक है ताकि मानसिक और शारीरिक शांति बनी रहे।


ज्योतिष के अनुसार ग्यारहवां घर ki दिशा: ऊँचाई और गेट के आसपास की सजावट

इस क्षेत्र में भवन की बाहरी शोभा और उसकी प्रतिष्ठा का संकेत मिलता है। यह सूर्य और शुक्र ग्रह से संबंधित है। इसका प्रभाव आत्मविश्वास और सामाजिक पहचान पर पड़ता है, इसलिए इसे आकर्षक और सुव्यवस्थित बनाए रखना चाहिए।


ज्योतिष के अनुसार बारहवां घर ki दिशा: ध्यान, अध्ययन, एकांत चिंतन, बुजुर्गों का कमरा

यह स्थान आत्म-चिंतन और आध्यात्मिक उन्नति का केंद्र होता है। यह गुरु और केतु से जुड़ा होता है। इस क्षेत्र को शांत, पवित्र और एकाग्रता के अनुकूल बनाना चाहिए। यहां पर दीपक, मंत्रोच्चार और ध्यान की व्यवस्था होनी चाहिए।


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निष्कर्ष:

घर केवल ईंट, पत्थर और छत से बनी संरचना नहीं है, बल्कि यह एक ऊर्जात्मक जीवित इकाई है। Vastuguruji के अनुभवों के अनुसार यदि हम घर के प्रत्येक स्थान को ज्योतिषीय और वास्तु सिद्धांतों के अनुरूप व्यवस्थित करें, तो हमारे जीवन में समृद्धि, स्वास्थ्य और मानसिक शांति बनी रहती है।

घर को इस रूप में देखना कि वह हमारी चेतना का विस्तार है — यह दृष्टिकोण ही वास्तु और ज्योतिष का सार है।

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